राग-रंग
छत्तीसगढ़ गीत-संगीत का भी गढ़ है । यहाँ आप छत्तीसगढ़ी गीत, लोकगीत, फिल्मी गीत सहित लोक कलाकारों द्वारा निर्मित प्रमुख ध्वनि-प्रकल्पों का रसपान कर सकते हैं । आइये मिलकर हम छत्तीसगढ़ी का रसास्वादन करते हैं ।
कवि सम्मेलन- रामेश्वर वैष्णव
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कवि रामेश्वर वैष्णव हिंदी और छत्तीसगढ़ी के वरिष्ठ कवि, गीतकार, ग़ज़लकार हैं । कई किताबें प्रकाशित और चर्चित । उन्हें हम हास्यावतार भी कह सकते हैं । हाल ही में आप सठियाये हैं यानी कि पूरे 60 साल के हो चुके हैं ।
पहले डाक एवं तार विभाग में पोस्टमास्टर थे । अब केवल कवितायी करते हैं । छत्तीसगढ़ी कविता का कोई भी मंच इनके बगैर हंसता-खिलखिलाता नहीं । और जब वे मंचों पर जब कविता पाठ करते हैं तो दर्शक उन्हें बार-बार सुनने का आग्रह करता है । लोग हँस-हँस कर लोट पोट हो उठते हैं । पिछले दिनों मुंगेली, बिलासपुर में पढ़ी गयी उनकी कुछ चर्चित कविताओं का आनंद लेते हैं यहाँ । तो तैयार हैं हंसने-खिलखिलाने के लिए .
तंय बरत रहिबे बाबा
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इस गीत के गायिका हैं- तारा कुलकर्णी । संगीत संयोजन में तारा कुर्रे उनके साथ दे रही हैं । यह गीत सतनाम पंथ के संस्थापक बाबा गुरूघासी दास की आराधना के लिए प्रख्यात विधा पंथी नृत्य के अंदाज में बंधा हुआ है । इस गीत को उपलब्ध कराने में डॉ. जे. आर.सोनी के प्रति हम आभार प्रकट करते हैं । तो लीजिए आपके सामने प्रस्तुत हैं तारा कुलकर्णी जीं.....
चल चलना बही मोर
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0गीत-संगीतः गोरे लाल बर्मन 0ताल-संयोजनः हृदय प्रकाश अनंत 0विशेष सहयोगीः इंजिनियर रेशम लाल घृतलहरे, चंदन बांधे 0 प्रस्तुतिः लोक सिंगार सांस्कृतिक सदन, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 0सौजन्यः डॉ. जे. आर. सोनी 0इस गीत में आप गुरुघासीदास के द्वारा सुझाये गये रास्तों की बात पंथी गीत की शैली में श्रवण कर सकत हैं 0
चलो गिरौधपुरी धाम बोलो जय सतनाम
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0गीत-संगीतः गोरे लाल बर्मन 0ताल-संयोजनः हृदय प्रकाश अनंत 0विशेष सहयोगीः इंजिनियर रेशम लाल घृतलहरे, चंदन बांधे 0प्रस्तुतिः लोक सिंगार सांस्कृतिक सदन, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 0सौजन्यः डॉ. जे. आर. सोनी 0 इस गीत में पवित्र-स्थल गिरौधपुरी की यात्रा का आव्हान किया गया है 0
मंदिरवा म म का करे जाबो
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0गीत-संगीतः गोरे लाल बर्मन 0ताल-संयोजनः हृदय प्रकाश अनंत 0विशेष सहयोगीः इंजिनियर रेशम लाल घृतलहरे, चंदन बांधे 0 प्रस्तुतिः लोक सिंगार सांस्कृतिक सदन, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 0सौजन्यः डॉ. जे. आर. सोनी 0इस गीत में आप गुरुघासीदास के द्वारा सुझाये गये रास्तों की बात पंथी गीत की शैली में श्रवण कर सकत हैं 0
बेटा अमरु रे मोर
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गीत-संगीतः गोरे लाल बर्मन ताल-संयोजनः हृदय प्रकाश अनंत
0 विशेष सहयोगीः इंजिनियर रेशम लाल घृतलहरे
0 चंदन बांधे प्रस्तुतिः लोक सिंगार सांस्कृतिक सदन, बिलासपुर, छत्तीसगढ़
0 सौजन्यः डॉ. जे. आर. सोनी
0 इस गीत में सतनाम पंथ के बाबा गुरूघासीदास को उनकी माँ स्मरण कर रही है ।
सन्ना मोर नन्ना
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गीत-संगीतः गोरे लाल बर्मन ।
ताल-संयोजनः हृदय प्रकाश अनंत ।
सहयोगीः इंजिनियर रेशम लाल घृतलहरे, चंदन बांधे ।
प्रस्तुतिः लोक सिंगार सांस्कृतिक सदन, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ ।
सौजन्यः डॉ. जे. आर. सोनी ।
इस गीत में सतनाम पंथ के संस्थापक बाबा गुरूघासीदास की जीवन-वृति का बखान किया गया है ।
प्रस्तुति
प्रगति रथ
Raipur, Chhattisgarh
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